नई दिल्ली (5 अगस्त): अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर बुधवार को विपक्षी दलों ने संसद परिसर में एकजुट होकर मार्च निकाला। विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करते हुए गृह मंत्री अमित शाह से संसद में आकर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
📌 मुख्य बिंदु
मार्च का मार्ग: यह मार्च संसद परिसर में ‘प्रेरणा स्थल’ (महात्मा गांधी की प्रतिमा) से शुरू होकर संसद भवन के ‘मकर द्वार’ तक निकाला गया।
प्रमुख मांग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई व अन्य मुद्दों पर जवाब दें।
शामिल दिग्गज नेता: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव सहित कई विपक्षी सांसद शामिल हुए।
मुख्य नारा: सांसदों के हाथों में एक बड़ा बैनर था जिस पर स्पष्ट शब्दों में ‘अमित शाह जवाब दो’ लिखा हुआ था।
सदन में आकर जवाब दे सरकार: मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि विपक्ष चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हमारी मांग यही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं। वे अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा। सदन शुरू हुए काफी दिन हो गए हैं। उनका सदन में न आना संसद का अपमान है।”
खरगे ने आरोप लगाया कि विपक्ष जनता के मुद्दों पर लगातार चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इससे भाग रही है और अपनी जवाबदेही से बच रही है।
”यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं” – प्रियंका गांधी
मार्च में शामिल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने पुलिस बल प्रयोग को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “इस मार्च का संदेश यह है कि सत्ता में बैठे लोगों की जनता के प्रति जिम्मेदारी है। यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं है और न ही कोई राज दरबार है।”
उन्होंने छात्रों पर हुए बल प्रयोग का जिक्र करते हुए कहा, “अगर कुछ हुआ है, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी किसी की तो होनी चाहिए। किसी ने तो इसका आदेश दिया होगा, इसलिए जिम्मेदारी लीजिए। यही इस देश की परंपरा रही है।”
5 अगस्त का महत्व और J&K की मांग
विपक्षी दलों ने 5 अगस्त की महत्वपूर्ण तारीख को देखते हुए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल करने की भी जोरदार मांग उठाई। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को ही संसद में विधेयक पारित करवाकर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर उसका विशेष दर्जा खत्म किया था।
मानसून सत्र में बरकरार है गतिरोध
बीते 20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में लगातार गतिरोध जारी है। इन प्रमुख मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसद पिछले कई दिनों से संसद परिसर में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों सदनों में हंगामे के कारण कार्यवाही भी लगातार बाधित हो रही है। सरकार का कहना है कि वह नियमों के तहत हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री के सीधे जवाब की मांग पर अड़ा है।

