संगीत जगत में मोहम्मद रफी साहब का नाम एक ऐसे सितारे के रूप में दर्ज है, जिनकी मखमली और रूहानी आवाज सीधा दिल में उतर जाती थी। रोमांटिक गानों से लेकर गंभीर भजन, गजल, कव्वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाले देशभक्ति गीतों तक—रफी साहब ने हर भाव को अपनी आवाज से अमर कर दिया।
आज हम आपको रफी साहब के उस ऐतिहासिक गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लगभग 75 साल पहले रिलीज हुआ था और जिसकी दीवानगी का आलम यह था कि रेडियो स्टेशन्स पर 24 घंटे बस इसी की फरमाइशें आती रहती थीं।
लाहौर से मुंबई तक का सफर और पहला बड़ा ब्रेक
मोहम्मद रफी ने अपनी सुरीली यात्रा की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो (AIR), लाहौर के लिए गाना रिकॉर्ड करके की थी। संगीत के प्रति उनका समर्पण उन्हें साल 1944 में मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) ले आया।
हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष किया, लेकिन उनके हुनर को सही पहचान मशहूर संगीतकार नौशाद ने दी। नौशाद साहब के साथ मिलकर रफी साहब ने भारतीय संगीत को कई नायाब तोहफे दिए।
1950 की फिल्म ‘बीवी’ और वो ऐतिहासिक गाना
बात साल 1950 की है, जब पर्दे पर एक फिल्म आई—’बीवी’ (Biwi)। इस फिल्म का एक गाना रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया:
”अकेले में वो घबराते तो होंगे,
मिटाके तुझको पछताते तो होंगे…”
यह गाना रिलीज होते ही उस दौर का सबसे बड़ा सुपरहिट चार्टबस्टर बन गया। इस गाने में छिपा दर्द और रफी साहब की मखमली आवाज ने सुनने वालों को अपना दीवाना बना दिया था।
रेडियो पर छाया था इस गाने का जादू
50 के दशक में जब मनोरंजन का सबसे बड़ा जरिया रेडियो हुआ करता था, तब इस गाने ने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
24 घंटे फरमाइश: देशभर के रेडियो स्टेशन्स पर दिन-रात इसी गाने की फरमाइशें आती थीं।
रेडियो पर कब्जा: श्रोताओं की दीवानगी ऐसी थी कि बिना इस गाने को बजाए रेडियो का कोई भी म्यूजिक शो पूरा नहीं माना जाता था।
अमर छाप: लोग घंटों बैठकर सिर्फ रेडियो पर रफी साहब की इस एक धुन का इंतजार करते थे।
आज भी अमर है रफी साहब का जादू
75 दशक बीत जाने के बाद भी यह गाना जब भी बजता है, सुनने वालों को उसी दौर में ले जाता है। रफी साहब आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘बीवी’ फिल्म का यह नगमा और उनकी रूहानी आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में पूरी शिद्दत के साथ जिंदा है।
मोहम्मद रफी का वो 75 साल पुराना गाना, जिसके लिए 24 घंटे बजती थी रेडियो की घंटी; आज भी सुनकर दिल थम जाता है
